कौन रोकेगा अब प्यार का रास्ता
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी
आज बैठे-बिठाये ये क्या हो गया
दिल की हर बात आँखों में आने लगी
मैं तो पी की नगरिया ...
(आ गये ) - 2 मुस्कुराने के दिन
लड़खड़ाने के दिन गुनगुनाने के दिन
मैने पायल तो पाँवों में बाँधी नहीं
और आवाज घुंघरू की आने लगी
मैं तो पी की नगरिया ...
कोई राहों में कलियाँ बिछने लगा
और इशारों से मुझको बुलाने लगा
मैने दरपन अभी तक तो देखा नहीं
( और बिंदिया ) - 2 मगर झिलमिलाने लगी
मैं तो पी की नगरिया ...
आज कैसी चली भीगी-भीगी पवन
सरसराने लगा मेरा नाजुक बदन
मैने पलकें अभी तक झुकाई नहीं
नींद क्यों मेरी आँखों में आने लगी
मैं तो पी की नगरिया ... |