(आ गयी बहार, आ गयी
मन की कली मुसकाई
नस नस में जागा प्यार, जागा प्यार) -2
आँखों ने क्या, मन से कहा
अंग अंग झूम रहा
होने लगा है खुमार, जागा प्यार
मन की कली मुसकाई
नस नस मैं जागा प्यार
विरह के दिन बीत गये
गाये गाये गीत नये
बजने लगे हैं तार, जागा प्यार
आ गयी बहार, आ गयी
मन की कली मुसकायी
नस नस में जागा प्यार, जागा प्यार
आँखों ने क्या, मन से कहा
अंग अंग झूम रहा
छाने लगा है खुमार, जागा प्यार
मन की कली मुसकाई
नस नस में जागा प्यार |