(आ गुप चुप गुप चुप प्यार करें
छुप छप आँखें चार करें) -2
ओ चार मुसाफिर रात के - 2
क्यूँ सुने हमारी बातें
तुमने तो देखी होगी ऐसी कितनी ही रातें
छुप जा रे जा छुप जजा तेरी मिन्नत सौ सौ बार करे
आ गुप चुप प्यार करें
छुप छुप गुप चुप आँखें चार करें
आ गुप चुप गुप चुप प्यार करें
छुपना है तो जल्दी छुप जा - 2
रात है थोड़ि बाकी
जाते रहना जाये दोनो में और मेरा साकी
छुप जा रे जा छुप जा यूँ कब तक हम तकरार करे
तेरी मिन्नत सौ सौ बार करे
आ गुप चुप गुप चुप प्यार करें
छुप छुप आँखें चार करें
आ गुप चुप गुप चुप प्यार करें |