(आ जा) - 2 आ आ जा
बिछड़े हुऐ साजन जिस देस गया है
उस देस का रास्ता सपने में दिखा जा
आ जा
बिरहा ने कलेजा यूँ कर दिया छलनी
जैसे कोई बंसी
जंगल में पड़ी हो आँहों से भरी हो
होठों से लगा के आँहों में समा के
तू गीत बना जा
आ जा
हो नैन में ऐसे ज्यूँ सीप में मोती
और प्राण में ऐसे ज्यूँ दीप में ज्योती
सोता हुआ दीपक पल भर को जगा जा
आ जा |