(आशा: आ जा मेरे साथी आ जा रफी: आ जा मेरे साथी आ जा) - 2 रफी: यही यही जादू भरी मीठी तान जिसको सुन कर डोलते मेरे तन मन प्राण किस मुरली ने छीन ली मेरी सुबह और शाम रातों की निंदिया गयी दिन का गया आराम