आ कहीं दूर चले जाये हम
दूर इतना की हमें छू ना सके कोई गम
आ कहीं दूर ....
फूलों और कलियों से महके हुऐ इक जंगल में
इक हसीं झील के साहिल पे हमारा घर हो
ओस में भीगी हुई घास पे हम चलते हो
रंग और नूर में डूबा हुआ हर मंजर हो
मैं तुझे प्यार करूँ मेरे सनम
तू मुझे प्यार करे मेरे सनम
आ कहीं दूर ...
आ आ
शाम का रंग हो गहरा तो सितारे जागे
रात जो आये तो रेशम से अंधेरे लाये
चाँद जब झील के पानी में नहाने उतरे
मेरी बाहों में तुझे देख के शरमा जाये
में तुझे प्यार करूं मेरे सनम
तू मुझे प्यार करे मेरे सनम
आ कहीं दूर .... |