(आ मेरे राँझना, रुख्सत का है समा
आँखों में दम है, लबों पे रुकी है जान) - 2
? नगमों से भी सजा, अब मेरा कारवान चला - 2
आ भी जा तेरे कदमों पे वार दूँ, ये जाने ना समा
आ मेरे राँझना
सुन मेरे आखिरी खता ?, रुकने लगी मेरी जुबाँ - 2
खतम होने को है अब जहाँ से उलफत की दास्ताँ
आ मेरे राँझना |