आ फिर से मेरे प्यार की किस्मत संवार दे
उजड़े हुए चमन को पयाम-ए-बहार दे
जब तू नहीं तो दिल भी नहीं इख्तियार में
इक उम्र काट दी है तेरे इंतजार में
इस बेकरार दिल को कभी तो करार दे
उजड़े हुए चमन को
कब से मेरा ख्याल तेरे दिल से दूर है
कश्ती किसी गरीब की साहिल से दूर है
आ अब तो आ के मुझ को किनारे उतार दे
उजड़े हुए चमन को |