(आधी रात जब चाँद ढले और कोई ना हो पिछवाड़े में
छाप दबाके ठाड़े रहियो तू आधे रे) - 2
मिन्नत करे ना मानियो
पैया पड़े ना मानियो
अगर वो हा कह दे ना कहना
वो ना कहदे हा कहना
जान की कसम दे तो
आधी रात जब चाँद ढले और कोई ना हो पिछवाड़े में
छाप दबाके ठाड़े रहियो तू आधे रे
मिन्नत करे ना मानियो
पैया पड़े ना मानियो
जेवर ना बोले कोई
घूंघट ना खोले कोई
सखिया दिखा दिजियो
बातन में उलझाये तो
पूछो जो समझाये तो
तो मुंडिया हिला दि जियो
दरवाजे से आना लगा के
सुनती होगी सब सखिया
लाज वाज सब छोड़ छाड़
कुन्डी किवाड़े में
मिन्नत करे ना मानियो
पैया पड़े ना मानियो
जा जा नादान पहेली
बरसों के बात सहेली
जगने की रात आयी है
देखा करती थी सपना
सपने को आखिर अपना
कहने की रात आयी है
देख पराये कसमों से
जलती क्यों है ब्याह कर ले
दूर दूर से ताक धाक बस आ जा अखाड़े में
आधी रात जब चाँद ढले और कोई ना हो पिछवाड़े में
छाप दबाके ठाड़े रहियो तू आधे में
मिन्नत करे ना मानियो
पैया पड़े ना मानियो
गुड़िया बटोले मोरे डोली में रखवा दिजो
ननई कहानी लावे भैया को बुलवा दिजो
डोली गली में खड़ी - 2
आ....
मैया को लेकर जावे
संग भी जो सहेली
बाबुल रे बाबुल तोरी
जायी ना जाये अकेली - 2
डोली गली में खड़ी - 4 |