आदमी आदमी से मिलता है
दिल मगर कम किसी से मिलता है
आदमी आदमी से मिलता है
भूल जाता हूँ में सितम उस के
वो कुछ इस सादगी से मिलता है
आदमी आदमी से मिलता है
मिल के भी जो कभी नहीं मिलता
टूट कर दिल उसी से मिलता है
आदमी आदमी से मिलता है
आज क्या बात है के फूलों का
रंग तेरी हसीं से मिलता है
आदमी आदमी से मिलता है
सिलसिला फितना-ए-कयामत का
तेरी खुश-कामती से मिलता है
आदमी आदमी से मिलता है
कारोबार-ए-जहाँ सँवरते हैं
होश जब बेखुदी से मिलता है
आदमी आदमी से मिलता है
आदमी आदमी से मिलता है
दिल मगर कम किसी से मिलता है
आदमी आदमी से मिलता है |