रातें ढलती नहीं
दिन भी निकलता नहीं
उसकी मरजी बिना पत्ता हिलता नहीं
रब जो चाहे वही तो होना हैं
आदमी खिलोना है - 2
रब जो चाहे वही तो होना है - 2
आदमी खिलोना है - 2
(जीना है हसके हमें जीवन का हर पल
कोई ना जाने यहा क्या हो जाये कल) - 2
हर ख्वाब यहा पे सजोना है - 2
आदमी खिलोना है - 2
रब जो चाहे वही तो होना है - 2
आदमी खिलोना है - 6 |