ऐ आसमान तेरी जमीन पर
कब तलक चलेगा ये कब तलक
ऐ आसमान तेरी जमीन पर - 2
कब तलक चलेगा ये कब तलक - 2
टुकड़े टुकड़े करके धरती मा के दिल के
हमने डाल दिया है खुद को ही मुश्किल में
ये सियासत हमारी
ये सियासत तुम्हारी
कुछ खुदा के है बंदे
राम के कुछ पुजारी
एक है एक हम आसमान के लिये
नाम हमने जमीन पर जुदा कर लिये
ऐ आसमान तेरी जमीन पर
कब तलक चलेगा ये कब तलक - 2
किस लिये किसके लिये
होती ये जंग है
रब ने तो सिखाया था
के रहना संग है
हर तरफ नफरतें है
हर तरफ मुश्किलें है
रस्ते है ये कैसे
कौनसी मंजिलें है
जिन्दगी मौत से मिल रही है गले
हक वतन के सिपाही अदा कर चले
ऐ आसमान तेरी जमीन पर
कब तलक चलेगा ये कब तलक - 2 |