आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे - 3
मेरे अपने मेरी होने की निशानी माँगे
आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे
मैं भटकता ही रहा दर्द के वीराने में
वक्त लिखता रहा चेहरे पे हर पल का हिसाब
मेरी शोहरत मेरी दीवानगी की नजर हुई
पी गयी मय की बोतले मेरी गीतों की किताब
आज लौटा हूँ तो हसने की अदा भूल गया
ये सहर भूला मुझे मैं भी इसे भूल गया
मेरे अपने मेरी होने की निशानी माँगे
आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे
मेरा फन फिर मुझे बाजार में ले आया है
ये वो जगह के जहाँ मेरो वफा बिकते हैं
बाप बिकते हैं और लख्ते जिगर बिकते हैं
कूख बिकती हैं दिल बिकते हैं सर बिकते हैं
इस बदलती हुई दुनिया का खुदा कोई नहीं
सस्ते दामो पे यहाँ रोज खुदा बिकते हैं
हर खरीदार को बाजार में बिकता पाया
हम क्या पायेंगे किसी ने यहा क्या पाया
मेरे अहसास मेरे फूल कहीं और चले
बोल पूजा मेरी बच्ची कहीं (और चले) - 2.... और चले |