आईने के सौ टुकड़े, कर के हम ने देखे हैं
एक मैं भी तनहा थे, सौ में भी अकेले हैं
जो बना एक साथी, वो भी हम से छूटा है
बेवफा नहीं जब वो, फिर क्यों हम से रूठा है
खोयी खोयी आँखों में, आँसुओं के मेरे हैं
उस का हाल क्या होगा, यही गम सताता है
नींद भी नहीं आती, दर्द बढ़ता जाता है
जिन्दगी की राहों में, लोग हम से खेले हैं
हर तरफ उजाला है, दिल में एक अंधेरा है
सामने कब आयेगा, क्यों छुपा सवेरा है
मेरा दिल जिगर देखो, कितने दर्द झेले हैं |