सुनीता सुनीता सुनीता
ऐसा कभी हुआ नहीं जो भी हुआ खूब हुआ
देखते ही तुझे होश गुम हुऐ होश आया तो दिल मेरा दिल ना रहा
ऐसा कभी हुआ नहीं जो भी हुआ खूब हुआ
रेशमी जुल्फें है सावन की घटाओं जैसी
पलकें हैं तेरी घने पेड़ की छाँव जैसी
भोलापन और हंसी आफरीं आफरीं
ऐसा कभी हुआ नहीं ...
झील सी आँखों में मस्ती के जाम लहराये
जब होंठ खुले तेरे सरगम बजे, महके फिजाये
हर अदा दिल नशीं आफरीं आफरीं
ऐसा कभी हुआ नहीं ...
पतली सी गर्दन में एक बाल है सुराही जैसा
अंदाज मटकने का देखा ना किसी ने ऐसा
गुलबदन नाजनीं आफरीं आफरीं
ऐसा कभी हुआ नहीं ... |