शाम जब करवट ले के रात की आहट देती है
पच्छिम की लाली बुझती आँखों में काजल लगाती है
नीले नीले अंबर पे चाँद जब आता है
प्यासा दिल गाता है ऐसा कोई साथी हो ऐसा कोई प्रेमी हो
ऐसा कोई साथी हो ऐसा कोई प्रेमी हो - 2
प्यास दिल की बुझा जाये
नीले नीले अंबर पर चाँद जब आये प्यार बरसाये हमको तरसाये
ऐसा कोई साथी हो, ऐसा कोई प्रेमी हो प्यास दिल की बुझा जाये
नीले नीले अंबर पर चाँद जब आये प्यार बरसाये हमको तरसाये
(हो ऊंचे ऊंचे पर्वत जब चूमते है अंबर को
प्यासा प्यासा अंबर जब चूमता है सागर को) - 2
प्यार से कसने को बाहों में बसने को
दिल मेरा ललचाये कोई तो आ जाये
ऐसा कोई साथी हो ऐसा कोई प्रेमी हो प्यास दिल की बुझा जाये
नीले नीले अंबर पर चाँद जब आये प्यार बरसाये हमको तरसाये
(छम छम करता सावन बूंदों के बान चलाये
सतरंगी बरसातों में जब तन मन भीगा जाये) - 2
प्यार में नहाने को डूब ही जाने को
दिल मेरा तड़पाये ख्वाब जगा जाये
ऐसा कोई साथी हो ऐसा कोई प्रेमी हो प्यास दिल की बुझा जाये
नीले नीले अंबर पर चाँद जब आये प्यार बरसाये हमको तरसाये |