हम और तुम थे साथी
अभी है कल की बात
आज सफ़र में तुमने क्यों
छोड़ दिया मेरा साथ
कैसे हैं ये अंधेरे ढलते नहीं
मीलों तलक़ उजाले मिलते नहीं
हमारे तुम्हारे
हमारे तुम्हारे जीवन में कैसे आई
ये अंधियारी रात
आज सफ़र ...
जलता है दिल मैं फिर भी खामोश हूँ
किससे करूँ मैं शिकवा क्या दोष दूँ
हमारे तुम्हारे
हमारे तुम्हारे सपने जो सच हुए थे
थामे हैं मेरा हाथ
आज सफ़र ... |