रफी:
आ जा के इन्तज़ार में, जाने को है बहार भी
तेरे बगैर ज़िन्दगी, दर्द बन के रह गई
रफी:
अरमान लिये बैठे हैं हम
सीने में है तेरा ही ग़म
तेरे दिल से प्यार की वो तड़प किधर गई
आ जा के इन्तज़ार ...
लता:
दिल की सदा पे ऐ सनम
बढ़ते गए मेरे कदम
अब तो चाहे जो भी हो दिल तुझे मैं दे चुकी
आ जा के इन्तज़ार ... |