आप की याद आती रही रात भर
चश्म-ए-नम मुस्कुराती रही रात भर
आप की याद आती रही ...
रात भर दर्द की शमा जलती रही
ग़म की लौ थरथराती रही रात भर ...
बाँसुरी की सुरीली सुहानी सदा
याद बनबनके आती रही रात भर ...
याद की चाँद दिल में उतरती रही
चाँदनी डगमगाती रही रात भर ...
कोई दीवाना गलियों में फिरता रहा
कोई आवाज़ आती रही रात भर ... |