आवारा ऐ मेरे दिल
जाने कहाँ है तेरी मंज़िल
आवारा ऐ मेरे दिल
वीरानों में, सहराओं में
आती जाती इन राहों में
तेरे इशारों पर
नाची मैं जीवन भर
आवारा ...
अब तो बतला, ऐ दिल मेरे
बाकी हैं अब कितने फेरे
अब तो रुके ये सफ़र,
मेरा भी हो कोई घर
आवारा ...
रात और दिन के ये दो चहरे
कौन है अपना, ये तो कह दे
मैं कौन हूँ मैं क्या हूँ
सच हूँ या साया हूँ
आवारा ...
कैसे कैसे तूफ़ाँ आये
बिजली चम्की, बादल छाये,
पर ना रुके हम तुम,
पर ना झुके हम तुम
आवारा ... |