ऐसे जलता है जिया, जैसे दीया
जीना सकूं अब में तन्हां हूँ पिया
ऐसे जलता है जिया, जैसे दीया, ऐसे जलता है जिया, जैसे दीया
जीना सकूं अब में तन्हां हूँ पिया
ऐसे जलता है जिया….
बेचैन मेरे मन का मयूरा
लगता है तन्हां जीवन अधुरा
तन में सभी है बिरहा के झुला
अब तोह पिया के अधरों का प्याला
तृष्णा पुकारे मृत उम् बेरियाँ
ऐसे जलता है जिया, जैसे दीया
जीना सकूं अब में तन्हां हूँ पिया
ऐसे जलता है जिया….
तू है अँधेरा, मैं हूँ अकेली
सूनी पड़ी है सारी हवेली
बेताबियों का कल बेसबेर है
अब होने वाली जल्दी पहर है
दूरी मिटा दे मिलके आजा पिया
ऐसे जलता है जिया, जैसे दीया
जीना सकूं अब में तन्हां हूँ पिया
ऐसे जलता है जिया…. |