अजनबी ख्वाब में, देखा था जो हो तुम वोही
दिल मुझे ले चला, चल पड़ा में तो वहीं
अजनबी (अजनबी) ख्वाब में, देखा था जो हो तुम वोही
दिल मुझे ले चला, चल पड़ा में तो वहीं
रात दिन मैं जागता हूँ, बीते पल को सोचता हूँ
हर कदम को देखता हूँ मैं - 2
अजनबी (अजनबी) ख्वाब में, देखा था जो हो तुम वोही
दिल मुझे ले चला, चल पड़ा में तो वहीं
कुछ तो नया एहसास है, जो मेरा मन उड़ रहा
रोके से भी रुकता नहीं, किस ओर ये मुड़ रहा
बूंदें घिरी ख्वाहिसों की तो मैं
एक पल भी ना खुद में रहा
अजनबी (अजनबी) ख्वाब में, देखा था जो हो तुम वोही
दिल मुझे ले चला, चल पड़ा में तो वहीं
खुशबू घुली जज्बात में, जाने पहेली है क्या
बैठे हुऐ सोचा करूँ, ये क्या मुझे हो गया
झोंका कोई एक अंजान सा, धड़कनों को मेरी छू रहा
अजनबी (अजनबी) ख्वाब में, देखा था जो हो तुम वोही
दिल मुझे ले चला, चल पड़ा में तो वहीं
रात दिन मैं जागता हूँ, बीते पल को सोचता हूँ
हर कदम को देखता हूँ मैं - 2
वो..ओ..
अजनबी (अजनबी) ख्वाब में, देखा था जो हो तुम वोही
दिल मुझे ले चला, चल पड़ा में तो वहीं |