जग सूना सूना ठहरा ठहरा सा
मेरा सपना अपना गहरा गहरा सा
जग सूना सूना ठहरा ठहरा सा
मेरा सपना अपना गहरा गहरा सा
सारे शहर की जगमग के भीतर है अँधेरा..
हर मुस्कान के पीछे छुपा हुआ गम का चेहरा
यही है सच तो हर पल को जीलूँ मैं जी भर के
और हँस हँस के ये कह दू दुखों के पत्थर से ..
अलविदा...
अलविदा...
अलविदा...
अलविदा...
कोई वक्त के आगे हारा हारा सा..
कोई प्यार में फिरता मारा मारा सा..
दिल के रिश्तों में क्यूँ दर्द हमेशा मिलता है
और क्यूँ काटों पर ही फूल सुखों का खिलता है
यही है सच तो मैं इस सच को ही अपनाउंगा..
मर भी जाउंगा तो मैं प्यार अमर कर जाउंगा..
अलविदा...
अलविदा...
अलविदा...
अलविदा...
अलविदा...
अलविदा...
अलविदा...
अलविदा... |