अजीम-ओ-शान शहंशाह
मरहबा
देता है हर दिल ये गवाही
दिल वाले हैं जिल्ल-ए-इलाही
जो कहीं भी निकलो जिधर से
गलियों गलियों सोना बरसे
(छन छननननन छनननन) - 2
मरहबा हो ओ
मरहबा
मरहबा हो ओ
मरहबा
अजीम-ओ-शान शहंशाह
तेरे मजहब है जो मोहब्बत
कितने दिलों पे तेरी हुकूमत
जितना कहें हम उतना कम है
तहजीब का तू संगम है
(छन छननननन छनननन) - 2
मरहबा हो ओ
मरहबा
मरहबा हो ओ
मरहबा
अजीम-ओ-शान शहंशाह
अजीम-ओ-शान शहंशाह
फुरवा रवा हमेशा हमेशा सलामत रहे
तेरे हो क्या बयाँ
तू शान-ए-हिंदुस्तान
हिंदुस्तान तेरी जान
तू जान-ए-हिंदुस्तान
मरहबा हो ओ
मरहबा
मरहबा हो ओ
मरहबा
यहाँ भी वहाँ भी है तेरी धूम
जलालुद्दीन अकबर |