भई बत्तूर, भई बत्तूर, अब जाएंगे कितनी दूर
नाज़ुक नाज़ुक मेरी जवानी, चलने से मजबूर
भई बत्तूर ...
डर लागे क्या होगा, पीछे कोई चोर लगा होगा
छोटी उमरिया सफ़र बड़ा मैं थक कर हो गई चूर
भई बत्तूर ...
चाल चलूं इठलाके, बिन सोचे बलखाके
छाई जवानी ऐसे जैसे नदिया हो भरपूर
भई बत्तूर ... |