(थी दबी आग वो बरसों की, मैं झुलस गयी ना मिला सनम
उसे ना देखा उसे ना पाया, बस रही तो बस उसकी लगन) - 2
पर्वतों से लावा बहता हुआ, सागर की गोद में लो जा गिरा - 2
इक आग लगी और मची जलन, लो भड़क गयी लो लगी लगन
साँसों मैं समेटे तनहाईयाँ, अंग अंग लेता अंगड़ाईयाँ - 2
दिल टूटा रोया रक्त बहा, उसे ?? दिया, उसे लगन लगन
(थी दबी आग वो बरसों की, मैं झुलस गयी ना मिला सनम
उसे ना देखा उसे ना पाया, बस रही तो बस उसकी लगन) - 2
(लगन लगन तेरी लगन लगन) ..... |