सुननेवालों सुनो ऐसा भी होता है
दिल देता है जो वो जान भी खोता है
प्यार ऐसा जो कारता है, क्या मर के भी मरता है, आओ तुम भी आज सुनलो
दास्तान है ये कि एक था नौजवान जो दिल ही दिल में एक हसीना का था दीवाना
वो हसीना थी के जिसकी खूबसूरती, का दुनियाभर में था मशहूर अफसाना
दोनो की ये कहानी है जिसको सभी कहते हैं ओम शान्ति ओम
(नौजवान की थी आरजू, उसकी थी ये जुस्तजू
उस हसीना में उसको मिले, इश्क के सारे रंगू) - 2
उसने ना जाने ये नादानी है, वो रेत को समझा के पानी है
क्यूँ ऐसा था, किस लिये था, ये कहानी है
दास्तान है ये के उस दिलकश हसीना के, निगाहों दिल में कोई दूसरा ही था
बेकार इस बात से उस नौजवान, के ख़्वाबों का अंजाम तो होना बुरा ही था
टूटे ख़्वाबों की उस दास्तान को सभी कहते है ओम शान्ति ओम
सुननेवालों सुनो ऐसा भी होता है, कोई जितना हसें उतना ही रोता है
दीवानी होके हसीना ,खाई क्या धोके हसीना, आओ तुम भी आज सुनलो
दास्तान है ये कि उस मासूम हसीना ने जिसे चाहा ओ था अंदर से हरजाइ
संगदिल से दिल लगाके, बेवफा के हाथ आके, उसने इक दिन मौत ही पाई
इक सितम का फसाना है जिसको सभी कहते है ओम शांति ओम
क्यूँ कोई कातिल समझता नहीं, ये जुल्म वो है जो झुकता नहीं
ये दाग वो है जो मिटता नहीं, रहता है खूनी के हाथ पर
खून उस हसीना का जब था हुआ, कोई वहा था पहुँच तो गया
लेकिन उसे वो बचा ना सका, रोया था प्यार उसके मौत पर
दास्तान है ये की जो पहचानता है खूनी को वो नौजवान है लौट के आया
कह रही है ज़िन्दगी कातिल समझले उसके सर पे छा चुका है मौट का साया
जन्मों की, कर्मो की है कहानी जिसे (कहते हैं ओम शांति ओम - 3) |