(कैसे, कोई कैसे कहे
दोस्ती क्या... है, क्या... है)-2
(जिन्दगी की धूप छाँव में
ये दोस्ती छाँव है...)-2
(कैसे, कोई कैसे कहे
दोस्ती क्या... है, क्या... है)-2
कैसे..., कैसे...
वक्त है इक नदी
कश्ती है दोस्ती
दिल हमसफर है..
हो ये...
हो लाख तूफान उठे
दिल तो दिल से मिले
फिर भी मगर है..
नीची हर लहर है..
बेअसर जहर है..
दोस्त अगर है ये..
कैसे, कोई कैसे कहे
दोस्ती क्या... है, क्या... है
दिल पे गहरी लिखी
है अगर दोस्ती
मिटती कहा है...
दोस्त चुप है अगर
उसकी हर एक नजर
उसकी जुबाँ है..
हो ये..
उसको भी है पता
हम वही है सदा...
जब वो जहाँ.. है.. ये...
(कैसे, कोई कैसे कहे
दोस्ती क्या... है, क्या... है)-2
(जिन्दगी की धूप छाँव में
ये दोस्ती छाँव है...)-2 |