कहीं दूर सेहरा के साए में
मचला था कोई तूफ़ान
और एक मसीहा के आने का
लिख के गया एलान द्रोणा
द्रोणा....
द्रोणा....
कहीं दूर सेहरा के साए में
मचला था कोई तूफ़ान
और एक मसीहा के आने का
लिख के गया एलान द्रोणा
द्रोणा....
द्रोणा....
सदीयों से सहमी सहमी गुमसुम
रूठी रूठी थी फिज़ा
ज़हरीली साँसों से वो जलती ठहरी ठहरी ये हवा
खोई खोई खामोशी में गूंजी
कहीं से उसकी सदा
सदीयों से सहमी सहमी गुमसुम
रूठी रूठी थी फिज़ा
ना जाने क्या था कैसा जूनून था
वो बहता था रग रग में जो हर सदी में
आता रहा है वो बनके द्रोणा
कहीं दूर सेहरा के साए में
मचला था कोई तूफ़ान
और एक मसीहा के आने का
लिख के गया एलान द्रोणा
द्रोणा....
द्रोणा....
क़दमों में लिपटे कैसे कैसे
उलझनों के सिलसिले
मंजिल के रास्ते में फैले थे
कांटो के वो काफिले
कायम रहा अपनी राहो पर वो
मिलती रही मुश्किलें
क़दमों में लिपटे कैसे कैसे
उलझनों के सिलसिले
रोके रुका ना कभी झुका ना वो
दर्द की बारिश में भी
हर एक सदी में आता रहा है वो
बनके द्रोणा
कहीं दूर सेहरा के साए में
मचला था कोई तूफ़ान
और एक मसीहा के आने का
लिख के गया एलान द्रोणा
द्रोणा....
द्रोणा.... |