ऐ मेरी ज़ोहरा-ज़बीं
तुझे मालूम नहीं
तू अभी तक है हंसीं
और मैं जवाँ
तुझपे क़ुरबान मेरी जान मेरी जान
ऐ मेरी ...
ये शोखियाँ ये बाँकापन
जो तुझ में है कहीं नहीं
दिलों को जीतने का फ़न
जो तुझ में है कहीं नहीं
मैं तेरी
मैं तेरी आँखों में पा गया दो जहाँ
ऐ मेरी ...
तू मीठे बोल जान-ए-मन
जो मुस्कुराके बोल दे
तो धडकनों में आज भी
शराबी रंग घोल दे
ओ सनम
ओ सनम मैं तेरा आशिक़-ए-जाबिदाँ
ऐ मेरी ... |