फलक तक चल साथ मेरे
फलक तक चल साथ चल
फलक तक चल साथ मेरे
फलक तक चल साथ चल
ये बादल की चादर
ये तारों के आँचल
में छुप जाये हम, पल दो पल
हो... ओ
(फलक तक चल साथ मेरे
फलक तक चल साथ चल) - 2
देखो कहाँ आ गये हम सनम साथ चलते
जहाँ दिन की बाहोँ में रातों के साये है ढलते
चल वो चौबारे ढूंढें, गिन में चाहत की बूँदें
सच कर दे सपनो को सभी
हो....
आँखों को मीचे मीचे, मैं तेरे पीछे पीछे
चल दूँ जो कह दे तू अभी
बहारों की छत हो, दुआओं का हाथ हो
पढ़ते रहे ये गजल
हो.... ओ
(फलक तक चल साथ मेरे
फलक तक चल साथ चल) - 2
देखा नहीं मैंने पहले कभी ये नजारा
बदला हुआ सा लगे मुझको आलम ये सारा
सूरज को हुई है राहत, रातों को करे शरारत
बैठे है खिड़की पे तेरी
हाँ
इस बात पे चाँद भी बिगड़ा, कतरा कतरा वो पिघला
भर आया आँखों में मेरी
तो सूरज बुझा दूँ, तुझे मैं सजा दूँ
सवेरा हो तुझ से ही कल
हो....ओ
(फलक तक चल साथ मेरे
फलक तक चल साथ चल) - 2
ये बादल की चादर
ये तारों के आँचल
में छुप जाये हम, पल दो पल
हो... ओ
(फलक तक चल साथ मेरे
फलक तक चल साथ चल) - 4 |