क्यूँ होने लगी, बेहया सी रातें,
क्यूँ होने लगी खुल के दिल की बातें
धुआं नहीं है आग लेकिन,
ऐसी लगी है जो वो सारे जहाँ को हौले से जला ले
क्यूँ होने लगी, बेहया सी रातें,
क्यूँ होने लगी खुल के दिल की बातें
काबू नहीं मेरा मुझ पे देखो देखो
न रोको ज़रा मुझे रोको हो सके तो
अब आज न जाने दिल,
मेरी आज न माने दिल
तेरी आज न माने दिल,
तो में कौन होता हूँ, इसको मना ने
क्यूँ होने लगी, बेहया सी रातें,
क्यूँ होने लगी खुल के दिल की बातें
हो तुम से गई, मेरी धड़कन, मेरी साँसे
तेरे लिए बनी आहें, मेरी साँसे
इन होटों का है कहना, तेरे लबो पे है बस रहना
तेरे होटों ने जिद करली
तो में कौन होता हूँ करने बहाने
क्यूँ होने लगी, बेहया सी रातें,
क्यूँ होने लगी खुल के दिल की बातें
धुआं नहीं है आग लेकिन,
ऐसी लगी है जो वो सारे जहाँ को हौले से जला ले
क्यूँ होने लगी, बेहया सी रातें,
क्यूँ होने लगी खुल के दिल की बातें इन रातें |