फिर तलब, ऐ तलब
फिर तलब, तलब, है तलब, तलब
बेसबब, बेसबब फिर तलब, तलब
शाम होने लगी है, शाम होने लगी
लाल होने लगी है, लाल होने लगी
जब भी सिगरेट जलती हैं, मैं जलता हूँ
आग पे पाँव पड़ता है, कम्बख़्त धुंएँ में जलता हूँ
जब भी सिगरेट जलती हैं, मैं जलता हूँ
फिर किसिने जलाई एक दियासलाई - 2
आसमाँ जल उठा है, शाम ने राख उड़ाई
उफालों जैसा सुलगता हूँ - २
कम्बख़्त धुंएँ में जलता हूँ
लंबे धागे धुंएँ के, सांस सिलने लगे हैं
प्यास उधड़ी हुई है, होंठ छिलने लगे हैं
शाम होने लगी है, शाम होने लगी
लाल होने लगी है, लाल होने लगी |