अखबारों में दिखते है
रोज़ सुबह घर से यह निकलते है
इंसानों में हर दिल में
जलते जलते जलते रावण
जलते जलते जलते रावण
हर तरफ़ उट थी दीवारें क्या करें ओओऊ
प्यरों के नीचे धब्ठे आसमानों पे
देखते देख देखो गए सपने
साँसों की कची डोरी से होऊ बंथी है सीमाएं ओओऊ
हाथों के बेठे पानी पे होऊ दिकथी है आशाएं ओओऊ
कह दे कह दे इस शहर के भाई लोग के पॉवर
कह दे कह दे इस शहर के भाई लोग के पॉवर
देखते देख देखो गए सपने
अखबारों में दिखते है
रोज़ सुबह घर से यह निकलते है
इंसानों में हर दिल में
जलते जलते जलते रावण
जलते जलते जलते रावण
हर तरफ़ उट थी दीवारें क्या करें ओओऊ
प्यरों के नीचे धब्ठे आसमानों पे
देखते देख देखो गए सपने
अखबारों में…. |