रातों की तन्हाई में
सुबहो की परछाई में...
चेहरा है क्या
ये मेरी आंखों में
खुशबू है क्या
ये मेरी साँसों में
कैसा ये राज़ है...
जो के खुलता नहीं..
क्यूँ मेरे ज़हन में...
तू है ऐ अजनबी..
हे हे हे हे हे
हे हे
वो हो हो...
हे हे हे हे हे
हे हे
होता है जो सवालों में
मिलता नहीं जवाबों में
रहता है जो ख्यालों में
अब तक है वो इजाफ़ो में...
महफिल का यह कैसा मौसम
ना धूप है ना है शबनम
ओ ओ.....
कैसा ये राज़ है...
जो के खुलता नहीं..
क्यूँ मेरे ज़हन में...
तू है ऐ अजनबी..
हे हे हे हे हे
हे हे
हे हे हे हे हे
हे हे
वो हो हो...
हे हे हे हे हे
हे हे
रातों की तन्हाई में
सुबहो की परछाई में...
चेहरा है क्या
ये मेरी आंखों में
खुशबू है क्या
ये मेरी साँसों में
जाने है क्या सितारों में
गर्दिश सी है इशारों में
पतझड़ सी है बहारों में
तूफ़ान सा है किनारों में
दस्तक सी है क्या ये हर दम..
आहट सी है क्या ये हर दम...
ओ ओ ओ....
कैसा ये राज़ है...
जो के खुलता नहीं..
क्यूँ मेरे ज़हन में...
तू है ऐ अजनबी..
हे हे हे हे हे
हे हे
हे हे हे हे हे
हे हे
वो हो हो...
हे हे हे हे हे
हे हे
हे हे हे हे हे
हे हे
अजनबी अजनबी...
वो ओ ओ ओ ओ ओ....
हे हे हे हे हे
हे हे... |