हो ओ ओ..
हो ओ ओ..
हो ओ ओ ओ .ओ..
हो ओ ओ..
कैसे मुझे तुम मिल गई
किस्मत पे आए ना यकीं
उतर आई जीत में
जैसे चाँद उतर ता है
कभी हौले हौले धीरे से
गुन गुनी धूप की तरह
से तरंगो में तुम
छू के मुझे गुज़री हो युंह
देखू तुम्हे या मैं सुनूँ
तुम हो सुकून
तुम हो जूनून ..
क्यूँ पहरे रात आई तुम
कैसे मुझे तुम मिल गई
किस्मत पे आए ना यकीं
मैं तो यह सोचता था
के आज कल कुछ बताने को
फुर्सत नहीं
फिर भी तुम्हे बनाके वो
मेरी नज़र मैं चढ़ गया
रित पे दुआ..और बन गया
बदले रास्ते झरने और नदी
बदली दीप की तिन तिन
छेड़े जिंदगी धुन कोई नहीं
बदली बरखा की रिमझिम
बदलेंगी ऋतुएं अदा..
पर मैं रहूंगी सदा ..
उसी तरह तेरी बाहों में
बाहें दाल के
हर लम्हा हर पल
जिंदगी सितार होगई
रिमझिम मल्हा होगई
मुझे आता नहीं
किस्मत पे अपनी यकीं
कैसे मिली मुझको तू |