कश लगा, कश लगा, कश लगा, कश लगा....
कश लगा, कश लगा, कश लगा - 2
ज़िन्दगी ऐ कश लगा - 2
हसरतों कि राख़ उड़ा
ये जहाँ पानी है, बुलबुला है, पानी है
बुलबुलों पे रुकना क्या, पानियों पे बहता जा बहता जा
कश लगा, कश लगा, कश लगा....
जलती है तनहाईयाँ तपी हैं रात रात जाग जाग के
उड़ती हैं चिंगारियाँ, गुच्छे हैं लाल लाल गीली आँख के
खिलती है जैसे जलते जुगनू ??? में
आँखें लगी हो जैसे उपालों की ढेरियों में
दो दिन का आग है ये, सारे जहाँ का धुंआँ
दो दिन कि ज़िन्दगी में, दोनो जहाँ का ???
ये जहाँ पानी है, बुलबुला है, पानी है
बुलबुलों पे रुकना क्या, पानियों पे बहता जा, बहता जा
कश लगा, कश लगा, कश लगा....
छोड़ी हुई बस्तियाँ, जाता हूँ बार बार घूम घूमके
मिलते हैं वो निशान, छोड़े थे दहलीज चूम चूमके
जो पाये ??? जायेंगे, जंगल की ??? हैं
हाथगाड़िहयों पे मिलना दो दिन कि यारियाँ हैं
क्या जाने कौन जाये, ???? आये
हम भी कतार में हैं, जब भी सवारी आये
ये जहाँ पानी है, बुलबुला है, पानी है
बुलबुलों पे रुकना क्या, पानियों पे बहता जा बहता जा
कश लगा, कश लगा, कश लगा....
ज़िन्दगी ऐ कश लगा
हसरतों की राख उड़ा
ये जहाँ पानी है, बुलबुला है, पानी है
बुलबुलों पे रुकना क्या पानियों पे बहता जा, बहता जा
कश लगा, कश लगा, कश लगा.... |