लैला की साँस की डोर बंधा
वो दीवाना वो मजनू है
वो होश नहीँ बेहोश बावरा
नहीं जानता वो क्यों है
बेहोश उसे रहने दो
कि होश में वो आयेगा
तो नींद में उसकी लैला का
वो ख़्वाब टूट जायेगा - 3
[कोई पत्थर से ना मारे
कोई पत्थर से ना मारे
मेरे दीवाने को
दीवाने को] - 2
सो ही लेने दो
उसका दर्द यही है दवा यही है
सो ही लेने दो
उसका दिन यही है जहाँ यही है
सो ही लेने दो
कि वो जाग पड़ा तो डर जाये ना
फिर बिलक जायेगा कि पहलू में लैला नहीं है
मौत भी घबरायेगी हो...
मौत भी घबरायेगी पास में आने को
[कोई पत्थर से ना मारे
कोई पत्थर से ना मारे
मेरे दीवाने को
दीवाने को] - 2
रखना समझ के ये पत्थर
कल को वो दिन भी आयेगा
जब पत्थर होंगे ये मकान
इनकी भी होगी एक जुबाँ
कि दास्तान-ए-लैला मजनूँ
शख़्स शख़्स दोहरायेगा
पत्थर का ढेर ये आज ये कल का राज महल कहलायेगा
नहीं मिल पायेगा....
नहीं मिल पायेगा फिर वक्त तुम्हे पछताने को
[कोई पत्थर से ना मारे
कोई पत्थर से ना मारे
मेरे दीवाने को
दीवाने को] - 2 |