ओ…..ओ ..ओ …
मरमरी बाहें, सेनडली साँसे, तेरी ओर ले चली
मरमरी बाहें, सेनडली साँसे, तेरी ओर ले चली
रस भरी बातें, मदभरी रातें, तेरी ओर ले चली
गोरे कंधे पे काला तिल ,
क्या कहूं कैसा है कातिल
सारे जहाँ में उसके सिवा
मुझे कुछ भी नहीं हासिल
देख देख जैसे मेरा जिया शर्माए है ..
क्या करू रे बेशरम वोह तोह मेरा साया है
वो तो मेरा साया है…..
चंचली आँखें, मनचली जुल्फें, तेरी ओर ले चली
मरमरी बाहें, सेनडली साँसे, तेरी ओर ले चली
तुझे प्यार करू मैं बेपनाह
देखे करता है कौन मना
करने दो मुझे यह गुनाह..यह गुनाह
जिस्म को जलने दो रात भर
साँसों की धीमी सी आंच पर
और मेरे हमसफ़र मीठा सा यह दर्द देता है कितना मज़ा
तन मन तरसे है पल पल प्यार वो
भीगे भीगे सपने यह दे दो मेरे यार को … दे दो मेरे यार को…
आहटें सुनती करवटें गिनती, तेरी ओर ले चली
मरमरी बाहें, सेनडली साँसे, तेरी ओर ले चली |