जिंदगी से तेज़ भागूं वक्त खींचे मैं आगे चलूँ
कल मैं कुछ था आज कुछ हूँ अब किसी के न रोके रुकूं
जिंदगी से तेज़ भागूं वक्त खींचे मैं आगे चलूँ
कल मैं कुछ था आज कुछ हूँ अब किसी के न रोके रुकूं
मैं जो चाहूं रात को दिन और दिन को रातें मैं करू..मैं करू ..मैं करू
ओह गोड,,ओह गोड…ओह गोड तुस्सी ग्रेट हो, ओह गोड तुस्सी ग्रेट हो
ओह गोड तुस्सी ग्रेट हो. ओह गोड तुस्सी ग्रेट हो
हाथों से मैं पढ़ के छुलू आसमान
चाँद तारे कहते मेरे दरमियान
मेरी ऊँगली थाम के सुबह चले
मेरे कब्जे मैं है यह दोनों जहाँ
किस्मत की चाबी जीवन की डोरी देखो है मेरे हाथ मैं
किस को भी चाहूं जैसे नचाऊँ पॉवर है मेरी बांह में
में सारी दुनिया का मालिक मैं जो चाहूं वो करू ..वो करू …वो करू
ओह गोड,,ओह गोड…ओह गोड तुस्सी ग्रेट हो, ओह गोड तुस्सी ग्रेट हो
ओह गोड तुस्सी ग्रेट हो. ओह गोड तुस्सी ग्रेट हो
मैं हूँ कुदरत, मैं हूँ ताकत….तो क्यूँ दी तू ने यह आफत
मेरी धरती, मेरी जन्नत ..तोह पूरी करदे हर मन्नत
हू…दर्जा हमारा सब से है ऊंचा हमसा न कोई दूजा
ऊ…हम न होते तो सोचो तुम्हारी फिर कौन करता पूजा
मांगे बिना देता है जो ऐसा हूँ अन्तर्यामी
दया का तू जो सागर है तो क्यूँ आई फिर सुनामी
मान के तू ने दी अकल हमें पर देखले कैसे चलाया हमने
अरे अकल चला के मुझे इतना बतादे ज़रा कौन सा तीर चलाया तुमने
कंप्यूटर बनाया मैं तो रॉकेट बनाया मैंने सॅटॅलाइट बनाया
अरे मैं मैं मैं करता है मूरख
तुझको किसने बनाया …मैंने…
जान तेरी मेरी मुट्ठी मैं तू ही बता तेरा क्या करू ..क्या करू..क्या करू
ओह गोड तुस्सी ग्रेट हो. ओह गोड तुस्सी ग्रेट हो
ओह गोड तुस्सी ग्रेट हो. ओह गोड तुस्सी ग्रेट हो |