मैंने कलि का दिल नहीं तोडा, मैंने कलि से मुँह नहीं मोडा
लव के लिए अपना सब कुछ छोडा…..
मैंने कलि का दिल नहीं तोडा, मैंने कलि से मुँह नहीं मोडा
लव के लिए अपना सब कुछ छोडा…..
मैं तो कलि का मैं तो कलि का दीवाना मेरे यार
मैं तोह कलि पे मैं तो कलि पे अपना दिल गया हार
मैं तो कलि से मैं तो कलि से करना चाहू इकरार
चाहें चुनवा दो चाहें चुनवा दो लम्बी लम्बी दीवार
मान गए मुग़ल-ऐ-आज़म, इश्क मे डूबा यह आलम
मान गए मुग़ल-ऐ-आज़म, इश्क मे डूबा यह आलम
जब…हे…जब…कम ओं…जब…चलना..जब…कब
जब प्यार किया तो डरना क्या ..जब…,जब प्यार किया तो डरना क्या
प्यार किया कोई चोरी नहीं की
मैंने कलि का दिल नहीं तोडा, मैंने कलि से मुँह नहीं मोडा
लव के लिए अपना सब कुछ छोडा…..
प्यार किया कोई चोरी नहीं की ,
छुप छुप लाइफ मे जीना क्या
जब…तू…जब…मैं…जब…हाँ ….
जब प्यार किया तो डरना क्या
जब प्यार किया तो डरना क्या
मान गए मुग़ल-ऐ-आज़म, इश्क मे डूबा यह आलम
मान गए मुग़ल-ऐ-आज़म, इश्क मे डूबा यह आलम
प्रेम नगर का प्रिन्स हूँ मैं और तू है रथकासा
मैंने तुझको तू ने मुझको नैनो मैं फासा
जब…तू…जब…मैं…जब…हाँ….
तीर चले तलवार चले यारों के बादशाह ;
अपना प्यार माशा-अल्लाह किसकी है परवाह
इश्क का यह असर चख ले ओ बेखबर… चख ले ओ बेखबर
तीर चले तलवार चले यारों के बादशाह ;
अपना प्यार माशा-अल्लाह किसकी है परवाह
प्यार किया कोई चोरी नहीं की ,
छुप छुप लाइफ मे जीना क्या
जब…सो व्हाट…जब…हु केर्स…जब…आ हाँ….
जब प्यार किया तो डरना क्या
जब प्यार किया तो डरना क्या
मैंने कलि का दिल नहीं तोडा, मैंने कलि से मुँह नहीं मोडा
लव के लिए अपना सब कुछ छोडा…..
शेहजादा मैं कूल कूल तू सेक्सी अनारकली,
अपना चर्चा शहर शहर और गॉसिप गली गली…जब…मी…जब…यू…जब…ट्रू..जब
जंजीरे दीवारे पहरे ऑलवेज़ लगते रहें
वी डोन’ट केयर!! कह कर पागल प्रेमी मिलते रहें
इश्क का यह नशा, हर तरफ़ हर दिशा, हर तरफ़ हर दिशा
जंजीरे दीवारे पहरे ऑलवेज़ लगते रहें
वी डोन’ट केयर!! कह कर पागल प्रेमी मिलते रहें
प्यार किया कोई चोरी नहीं की
मैंने कलि का दिल नहीं तोडा, मैंने कलि से मुँह नहीं मोडा
लव के लिए अपना सब कुछ छोडा…..
प्यार किया कोई चोरी नहीं की
छुप छुप लाइफ मैं जीना क्या
जब…जब…जब..जब
जब प्यार किया तो डरना क्या
जब प्यार किया तो डरना क्या
मैंने कलि का दिल नहीं तोडा, मैंने कलि से मुँह नहीं मोडा
लव के लिए अपना सब कुछ छोडा…..
मुग़ल-ऐ मुग़ल-ऐ मुग़ल-ऐ-आज़म… मान गए मुग़ल-ऐ-आज़म, इश्क मैं डूबा यह आलम
मुग़ल-ऐ मुग़ल-ऐ मुग़ल-ऐ-आज़म… मान गए मुग़ल-ऐ-आज़म, इश्क मैं डूबा यह आलम |