(तू मुझसे जब से मिला है जाना, जीना है क्या ये जाना
तू मुझसे जब से जुदा है जाना, खुद को है मैने जाना
मुझे जीना आ गया, (मेहरबानी शुक्रिया - 3)) - 2
अब तो बस तुझको है पाना मकसद मेरा
अब तो बस तुझको है चाहना मजहब मेरा
मखमली सी बातें हो, मेहकी सी कुछ रातें हो
संदली तेरी साँसें हो सनम
अब ये कहना आ गया, (मेहरबानी शुक्रिया - 3)) - 2
हर तरफ दिखता है अब तो चेहरा तेरा
हर घड़ी आठों पहर हाँ शामो सुबह
बोलती मेरी आँखों को, अनकही कुछ बातों को
पढ़ भी ले तो अब ऐ जानेमन
गर तो रख ले दिल मेरा, (मेहरबानी शुक्रिया - 3)
तू मुझसे जब से मिला है जाना, जीना है क्या ये जाना
तू मुझसे जब से जुदा है जाना, खुद को है मैने जाना
मुझे जीना आ गाया, (मेहरबानी शुक्रिया - 3) |