सुनाये क्या तुमको
फ़साना किसी का
मेरा दिल भी था ये दीवाना किसी का
मगर उसके दिल में ना थी वफ़ा..
वफ़ा... वफ़ा...
वफ़ा...
सुनाये क्या तुमको
फ़साना किसी का
मेरा दिल भी था ये दीवाना किसी का
मगर उसके दिल में ना थी वफ़ा..
वफ़ा... वफ़ा...
वफ़ा...
रोते रोते कहता है ये ज़ख्म-ऐ-जिगर
आजा कभी मेरी तरफ़ तू लौटकर
रोते रोते कहता है ये ज़ख्म-ऐ-जिगर
आजा कभी मेरी तरफ़ तू लौटकर
अरमान है इतना ही
अरे बेवफा कर कभी वफ़ा..
वफ़ा... वफ़ा...
वफ़ा...
सुनाये क्या तुमको
फ़साना किसी का
मेरा दिल भी था ये दीवाना किसी का
मगर उसके दिल में ना थी वफ़ा..
वफ़ा... वफ़ा...
वफ़ा...
दिल मेरे जाना जिसको
दिल जानिया
देके मुझको वोही गया
तन्हाईयाँ
दिल मेरे जाना जिसको
दिल जानिया
देके मुझको वोही गया
तन्हाईयाँ
दिल को है बस यह गम
कभी उसने मुझसे न की वफ़ा...
वफ़ा... वफ़ा...
वफ़ा...
सुनाये क्या तुमको
फ़साना किसी का
मेरा दिल भी था ये दीवाना किसी का
मगर उसके दिल में ना थी वफ़ा..
वफ़ा... वफ़ा...
वफ़ा... |