रात सिमटी जायेगी
और चाँद बहता जायेगा
बस रात के हम मुसाफिर
हैं यहाँ
ख्वाब बढ़ते जायेंगे
और उम्र घट टी जायेगी
हर लम्हा टूट ता है आसमान
लेके चला जाने कहाँ
यह अजनबी.. कारवां
कारवां ..कारवां..
कारवां ..कारवां..कारवां ..
रात सिमटी जायेगी
और चाँद बहता जायेगा
बस रात के हम मुसाफिर
हैं यहाँ
ख्वाब बढ़ते जायेंगे
और उम्र घट टी जायेगी
हर लम्हा टूट ता है आसमान
लेके चला जाने कहाँ
यह अजनबी.. कारवां
कारवां ..कारवां..
कारवां ..कारवां..कारवां ..
कैसी खुशी है
कैसा यह गम हैं..
कैसी सज़ा..हैं
क्यूँ मिली है जिंदगी
पर तो लगे हैं
उड़ते नही हैं
जब कुछ नही है
क्यूँ सजी हैं रोशनी
शोला जगा दिया
देकर हवा..
ऐसा जहाँ तेरा
अब बता दे तू बता दे खुदा..
कारवां ..कारवां..कारवां ..
कारवां ..कारवां..कारवां ..
किसका बदन है
किसकी ज़मीन है
किसको पता है
क्यूँ लगी है आग सी..
रहना यहीं हैं
चलना यहीं है..
थोड़ा सफर है
क्यूँ मगर हैं बेबसी
सबको कहाँ मिला
दिल का सिला..
ऐसा जहाँ तेरा..
अब मिटा दे तू जला दे ..
खुदा..
रात सिमटी जायेगी
और चाँद बहता जायेगा
बस रात के हम मुसाफिर
हैं यहाँ
लेके चला जाने कहाँ
यह अजनबी.. कारवां
कारवां ..कारवां..
कारवां ..कारवां..कारवां ..
कारवां ..कारवां..कारवां ..
कारवां ..कारवां..कारवां .. |